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प्रस्तावना –

इस संसार में बहुत से प्रकार के साहित्यकार हुए लेकिन जिनकी अपनी अपनी काव्य की विशेषताएं भी हैं। तुलसीदास जी हमारे सभी कवियों में से सबसे प्रिय कवि माने जाते हैं । ये सब प्रिय कवि इसलिए माने जाते हैं क्योंकि इन्होंने बहुत सारी रचनाओं और हमारे संसार को सुधार के रूप में बहुत सारी रचनाओं को भी अपने द्वारा लिखा है।

इनका आरंभिक जीवन परिचय –

प्राय: प्राचीन कवियों और लेखकों के जन्म के बारे में सही सही जानकारी नहीं मिलता इसी लिए  तुलसीदास के जीवन के विषय में भी कुछ  ऐसा ही है। तुलसीदास जी का  जन्म सन  1535 में बांदा जिले में हुआ था । इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी था | इनका जन्इम अशुभ मुहूर्त में हुआ था जिसके कारण इनके ब्राह्मण माता-पिता ने इन्हें अशुभ मानकर जन्म लेने के बाद ही इनका त्याग कर दिया था । इस कारण इनका बचपन बहुत ही कठिनाइयों में व्यतीत हुआ | तुलसी दास के गुरु का नाम नर हरी दास था और गुरु नरहरी दास ने तुलसीदास को  शिक्षा दी | इसके बाद इनका विवाह रत्नावली नाम की कन्या से हुआ था । विवाह के बाद रत्नावली ने तुलसीदास को  एक कटु बात बोल दी थी जिसको सुनकर इन्होंने राम भक्ति को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया था | तुलसीदास ने अपने जीवन काल में लगभग 37 ग्रंथों की रचना की परंतु इनके 12 ग्रंथ ही प्रमाणिक माने जाते हैं और इनकी मृत्यु संवत 1680 में हो गया |

तुलसीदास जी का काव्यगत विशेषताएं –

महान कवी तुलसीदास का जन्म ऐसे काल में हुआ जब भारत के सभी हिंदू मुसलमान शासकों के अत्याचारों से पीड़ित थे । और सभी लोगों का नैतिक चरित्र गिर रहा था और लोग संस्कार हीन हो रहे थे। तब ऐसे समाज के सामने एक आदर्श स्थापित करने की आवश्यकता थी, ताकि भारत के सभी लोग उचित और अनुचित के भेद को समझकर सही आचरण कर सके । महान कवि तुलसीदास ने रामचरित नामक महान काव्य की रचना की औए इनके माध्यम से इन्होंने अपने प्रभु श्री राम का चरित्र चित्रण किया हालांकि रामचरितमानस से भक्ति भावना प्रधान का भी है । इसके माध्यम से जनता को अपने सामाजिक कर्तव्य का ज्ञान प्राप्त हुआ |  इसमें वर्णित विभिन्न घटनाओं और चरित्रों ने सामान्य जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ा | रामचरित मानस के अलावा इन्होंने कवितावली , गीतावावली , दोहावली , जानकीमंगल , विनयपत्रिका , रामायण , वैराग्य , इत्यादि ग्रंथो की रचना की थी | 
तुलसीदास जी वास्तव में एक महान सच्चे भक्त और सच्चे लोकनायक के साथ साथ एक  महान कवि थे । इन्होने कभी भी किसी संप्रदाय का खंडन नहीं किया परंतु सभी को समान रूप से सम्मान दिया | और तुलसीदास जी ने निर्गुण एवं सगुण दोनों धाराओं की स्तुति की तथा काव्य के माध्यम से इन्होंने कर्म ज्ञान एवं भक्ति ज्ञान की प्रेरणा दी | रामचरितमानस के आधार पर इन्होंने एक आदर्श भारतवर्ष की कल्पना की । तुलसीदास जी के सभी काव्य में सभी रसों को स्थान मिला है | तुलसीदास जी को  संस्कृति के साथ-साथ राजस्थानी, भोजपुरी ,बुंदेलखंडी ,प्राकृतिक ,अवधी, ब्रज, अरबी इत्यादि भाषाओं का ज्ञान भी था | जिनका प्रभाव उनके काव्य में दिखाई देता है | 

उपसंहार – 

एक सुन्दर समाज के निमार्ण के लिए साहित्य को माध्यम बनाया जा सकता हैं और जब हमारा समाज स्वस्थ होगा तभी अपना राष्ट्र सक्तिशाली बन सकता है |

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