यूपी बोर्ड कक्षा 12 हिंदी ‘हम और हमारा आदर्श’ के गद्यांश का उत्तर – कक्षा 12 सामान्य हिंदी हम और हमारा आदर्श गद्यांशों का उत्तर – UP Board class 12th Hindi Hum Aur Hamara Adarsh – Kaksha 12 Samanya Hum Aur Hamara Adarsh Ke mahatvpurn gadyansh

यूपी बोर्ड कक्षा 12 हिंदी ‘हम और हमारा आदर्श’ के गद्यांश का उत्तर – कक्षा 12 सामान्य हिंदी हम और हमारा आदर्श गद्यांशों का उत्तर – UP Board class 12th Hindi Hum Aur Hamara Adarsh – Kaksha 12 Samanya Hum Aur Hamara Adarsh Ke mahatvpurn gadyansh

इस पोस्ट को मैंने यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं सामान्य हिंदी के गद्यांश अध्याय 6 हम और हमारा आदर्श के सभी महत्वपूर्ण गद्यांश को बताया है यह गद्यांश पिछले साल यूपी बोर्ड परीक्षा में पूछे गए हैं अगर आप इन गद्यांशों को तैयार कर लेते हैं तो आप 10 नंबर आसानी से पा सकेंगे क्योंकि यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं हिंदी के पेपर में हम और हमारा आदर्श तथा चैप्टरों से कुल 10 अंकों का गद्यांश बोर्ड परीक्षा में पूछ लिया जाता है इसलिए आप यहां पर बताए गए, यूपी बोर्ड कक्षा बारहवीं सामान्य हिंदी हम और हमारा आदर्श के सभी महत्वपूर्ण गद्यांशो को जरूर तैयार कर ले |

यूपी बोर्ड कक्षा 12 हिंदी 'हम और हमारा आदर्श' के गद्यांश का उत्तर - कक्षा 12 सामान्य हिंदी हम और हमारा आदर्श गद्यांशों का उत्तर - UP Board class 12th Hindi Hum Aur Hamara Adarsh - Kaksha 12 Samanya Hum Aur Hamara Adarsh Ke mahatvpurn gadyansh

कक्षा 12 सामान्य हिंदी हम और हमारा आदर्श गद्यांशों का उत्तर-

नीचे मैंने यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं सामान्य हिंदी के गद्यांश अध्याय 6 हम और हमारा आदर्श के सभी महत्वपूर्ण गद्यांश को बताया है |

1. मैं खासतौर से युवा छात्रों से ही क्यों मिलता हूँ? इस सवाल का जवाब तलाशते हुए मैं अपने छात्र-जीवन के दिनों के बारे में सोचने लगा। रामेश्वरम् के द्वीप से बाहर निकलकर यह कितनी लम्बी यात्रा रही। पीछे मुड़कर देखता हूँ तो विश्वास नहीं होता। आखिर वह क्या था जिसके कारण यह सम्भव हो सका? महत्त्वाकांक्षा ? कई बातें मेरे दिमाग में आती हैं। मेरा ख्याल है कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि मैंने अपने योगदान के मुताबिक ही अपना मूल्य आँका बुनियादी बात जो आपको समझनी चाहिए वह यह है कि आप जीवन की अच्छी चीजों को पाने का हक रखते हैं, उनका जो ईश्वर की दी हुई हैं। जब तक हमारे विद्यार्थियों और युवाओं को यह भरोसा नहीं होगा कि वे विकसित भारत के नागरिक बनने के योग्य हैं तब तक वे जिम्मेदार  और ज्ञानवान् नागरिक भी कैसे बन सकेंगे
(क) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए ।

उत्तर- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी गद्य भाग में संकलित ‘हम और हमारा आदर्श’ शीर्षक से लिया गया है जिसके लेखक डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम जी हैं |

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- अनेकानेक उपलब्धियों एवं प्रसिद्धियों के धनी डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम ने प्रस्तुत अंश के माध्यम से भारतीय युवाओं को यह बताना चाहा है कि जब तक उन्हें यह विश्वास नहीं होगा कि वे देश के नागरिक बनने की सम्पूर्ण योग्यता स्वयं में रखते हैं तब तक वे एक जिम्मेदार और ज्ञानवान नागरिक नहीं बन सकते अर्थात जब तक व्यक्ति को अपनी कीमत का आकलन नहीं होगा तब तक वह महत्त्वपूर्णकार्य नहीं कर सकता।

(ग) डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम खासतौर से किससे मिलते थे?

उत्तर- डॉ० ए०पी० जे० अब्दुल कलाम खासतौर से देश के युवा छात्रों से मिलते थे।

(घ) डॉo अब्दुल कलाम की कामयाबी के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात क्या रही ?

उत्तर- डॉ० ए०पी० जे० अब्दुल कलाम की कामयाबी के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने अपने योगदान के मुताबिक ही अपने मूल्य का आकलन किया।

(च) व्यक्ति किन चीजों को पाने का हक रखता है? अथवा आप किन चीजों को पाने का हक रखते हैं?

उत्तर- व्यक्ति या हम उन सभी अच्छी चीजों को पाने का हक रखता है जो ईश्वर की दी हुई हैं।

(ज) लेखक युवा छात्रों से ही क्यों मिलता है?

उत्तर- लेखक विशेष रूप से युवा छात्रों से इसलिए मिलता है, क्योंकि वह स्वयं के छात्र – जीवन के अनुभवों एवं निष्कर्षों के समान यह आवश्यक मानता है कि छात्र – जीवन में ही विद्यार्थियों में वांछित गुणों, योग्यताओं एवं क्षमताओं को विकसित किया जा सकता है। इसके आधार पर ही उन्हें विकसित भारत का उत्तरदायी व ज्ञानवान नागरिक बनाया जा सकता है।

(झ) उक्त पंक्तियों से आपको क्या प्रेरणा मिलती है ?

उत्तर- उक्त पंक्तियों से हमें यह प्रेरणा प्राप्त होती है कि हम अपने योगदान के अनुरूप ही अपना मूल्यांकन करना सीखें और इस आधारभूत बात को भली-भाँति समझे कि हम ईश्वर प्रदत्त जीवन की समस्त अच्छी वस्तुओं को प्राप्त करने के समान रूप से अधिकारी है। इसके साथ ही हमारे मन में यह पूर्ण विश्वास भी होना चाहिए कि हम विकसित भारत के नागरिक बनने के योग्य हैं।

2. “मैं यह नहीं मानता कि समृद्धि और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी हैं या भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच है। उदाहरण के तौर पर, मैं खुद न्यूनतम वस्तुओं का भोग करते हुए जीवन बिता रहा हूँ लेकिन मैं सर्वत्र समृद्धि की कद्र करता हूँ, क्योंकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो अंततः हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक हैं। आप अपने आस-पास देखेंगे तो पाएँगे कि खुद प्रकृति भी कोई काम आधे-अधूरे मन से नहीं करती। किसी बगीचे में जाइए। मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी। अथवा ऊपर की तरफ ही देखें, यह ब्रह्माण्ड आपके अनंत तक फैला दिखाई देगा, आपके यकीन से भी परे । (2015)
(क) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।

उत्तर- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी गद्य भाग में संकलित ‘हम और हमारा आदर्श’ शीर्षक से लिया गया है जिसके लेखक डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम जी हैं |

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से अब्दुल कलाम जी समृद्धि की कद्र करते हुए कहते हैं कि व्यक्ति को  कामयाब होने के लिए वह सभी हरसंभव प्रयास करने चाहिए जो वह कर सकता है। किसी भी कार्य को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए अर्थात् काम करते हुए उससे ऊबकर उसे बीच में नहीं छोड़ देना चाहिए। इसके लिए प्रकृति का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए वे कहते हैं कि यदि आप अपने आस-पास देखें तो आपको ऐसे प्रकृति के बहुत से उदाहरण मिल जाएँगे जो कि पूर्ण होते दिखेंगे यानी प्रकृति अपने किसी भी काम को अधूरे मन से नहीं करती। आप किसी फूलों के बाग में ही पहुँच जाइए वहाँ मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी, क्योंकि मौसम ने अपने काम को अधूरा नहीं छोड़ा। या फिर आप अपने ऊपर की ओर ही देखें तो आपको यह ब्रह्माण्ड इस तरह विस्तृत दिखाई देगा जिसका कोई अन्त नहीं है, जहाँ तक आप सोच भी नहीं सकते अर्थात् यह नभ भी हमें विस्तृत होने का यानी पूर्णता का सन्देश देता है।

(ग) लेखक किनको एक-दूसरे का विरोधी नहीं मानता ?अथवा समृद्धि और अध्यात्म के सम्बन्ध में लेखक क्या नहीं मानता ?

उत्तर- लेखक समृद्धि और अध्यात्म को एक दूसरे का विरोधी नहीं मानता।

(घ) डॉo कलाम समृद्धि की कद्र क्यों करते हैं? समृद्धि अपने साथ क्या लाती है?

उत्तर- डॉo कलाम समृद्धि की कद्र इसलिए करते हैं, क्योंकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो अन्ततः हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक है।

(च) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने छात्रों को क्या संदेश दिया है?

उत्तर- प्रस्तुत गद्यांश के माध्यम से लेखक ने छात्रों को प्रगति करने के लिए किसी भी कार्य को पूर्ण करके ही चैन लेने का सन्देश दिया है।

(ज) ‘न्यूनतम’ और ‘अनन्त’ का क्या अर्थ है ?

उत्तर- यहाँ ‘न्यूनतम’ का आशय कम-से-कम अथवा केवल अति आवश्यक वस्तुओं के उपभोग से है। इसी प्रकार ‘अनन्त’ का अर्थ है – जिसका अन्त न हो। यहाँ लेखक ने दूर-दूर तक विस्तृत ब्रह्माण्ड के लिए ‘अनन्त’ शब्द का प्रयोग किया है।

3. जो कुछ भी हम इस संसार में देखते हैं, वह ऊर्जा का ही स्वरूप है। जैसा कि महर्षि अरविन्द ने कहा है कि हम भी ऊर्जा के ही अंश हैं।इसलिए जब हमने यह जान लिया है कि आत्मा और पदार्थ; दोनों ही अस्तित्व का हिस्सा हैं, वे एक-दूसरे से पूरा तादात्म्य रखे हुए हैं तो हमें यह अहसास भी होगा कि भौतिक पदार्थों की इच्छा रखना किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक या गैर-आध्यात्मिक बात नहीं है। (2020)
(क) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।

उत्तर- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी गद्य भाग में संकलित ‘हम और हमारा आदर्श’ शीर्षक से लिया गया है जिसके लेखक डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम जी हैं |

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर- लेखक के अनुसार, आत्मा और पदार्थ; दोनों ही ऊर्जा के अथवा परमात्मा के अभिन्न अंश हैं, इसलिए समस्त पदार्थ या यह भौतिक जगत भी हमारे अध्यात्म का ही एक महत्त्वपूर्ण पहलू हैं। यही कारण है कि यदि कोई भौतिक पदार्थों की इच्छा रखता है तो यह किसी भी दृष्टि से लज्जाजनक या अध्यात्म के विरुद्ध बात नहीं है।

(ग) महर्षि अरविन्द ने क्या कहा है ?

उत्तर- महर्षि अरविन्द के अनुसार हम भी उसी ऊर्जा अथवा परम सत्ता के अंश हैं।

(घ) हम इस संसार में जो कुछ देखते हैं, वह क्या है ?

उत्तर- हम इस संसार में जो कुछ देखते हैं, वह ऊर्जा अथवा उस परम सत्ता का ही एक रूप है।

(च) ‘अस्तित्व’ और ‘तादात्म्य’ शब्दों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- यहाँ ‘अस्तित्व’ का आशय ऊर्जा अथवा उस परम सत्ता से है, जो शाश्वत है या जिसका सदैव अस्तित्व रहेगा। ‘तादात्म्य’ का अर्थ ‘अभिन्न सम्बन्ध’ से है

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